परेशानी… आज से काम बहिष्कार करेंगे डॉक्टर, सरकार बेफिक्र

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण काल में जहां डॉक्टरों के ऊपर मरीजों का इलाज करने की पूरी जिम्मेदारी है वहीं अगर डॉक्टर इन हालातों में काम बंद कर दे तो मरीजों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है. ऐसा ही कुछ इन दिनों अजमेर के सबसे बड़े अस्पताल माने जाने वाले जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में हो रहा है.

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यहां सरकार के व्यवहार से दुखी होकर डॉक्टरों ने रोजाना दो घंटे के लिए कार्य बहिष्कार करने का फैसला किया है. इसी के साथ डॉक्टर बीते कई दिनों से हाथ पर काली पट्टी बांध कर विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं. डॉक्टरों का प्रदर्शन आज सातवें दिन भी जारी है.

आफत !!! सरकार ने नहीं सुनी डॉक्टर्स की मांग, कार्य बहिष्कार को मजबूर

इस संबंध में रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. गोवर्धन लाल सैनी ने बताया कि सरकार उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक रुख नहीं अपना रही. सरकार की ओर से ऐसे व्यवहार को देखते हुए आज से डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार आंदोलन की शुरुआत की है. डॉक्टरों ने कहा कि अब प्रदेश भर के डॉक्टर अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने उतरेंगे. आगे जो होगा उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी.

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डॉ. सैनी का कहना है कि आज कोरोना संक्रमण काल में सरकार को सबसे अधिक जरूरत डॉक्टरों की है. आज के समय में भी सरकार हमारी नहीं सुन रही. ये सरकार की असंवेदनहीनता है. राज्य भर के डॉक्टरों में सरकार के खिलाफ रोष है. डॉक्टर अपनी शिफ्ट से अतिरिक्त घंटे निकाल कर काम कर रहे हैं. घंटों पीपीई किट पहन कर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. वहीं सरकार के पास डॉक्टरों की बात सुनने या उनसे बात करने की फुर्सत तक नहीं है.

बहिष्कार के लिए सरकार जिम्मेदार

सरकार के इस तरह के व्यवहार से उनकी मानसिकता जाहिर हो रही है. आज से अस्पताल में जो कार्य बहिष्कार हो रहा है इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा की है जिन्होंने डॉक्टरों के बार बार अनुरोध किए जाने पर भी उनकी मांगों पर गौर नहीं किया.

ये है डॉक्टर्स की मांग

दरअसल डॉक्टर्स की मांगों को लेकर सरकार से बात करना चाहते हैं मगर सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा. डॉक्टरों की नौ मांगे हैं. बीते एक महीने से डॉक्टर अपनी मांग को लेकर सरकार से आग्रह कर रहे हैं. डॉक्टर्स की मांग है कि बीते 2 सालों से लंहित वेतन, स्टाइपंड वृद्धि, परिवार के वैक्सीनेशन किए जाने जैसी मांगे प्रमुखता से उठाई गई है.

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डॉक्टरों ने मांग की है कि 2018 के पीजी बैच वाले फाइनल ईयर के डॉक्टरों का एग्जाम तय समय यानी मई के अंत में ही लिया जाए. सरकार ने नीट पीजी को 31 अगस्त 2021 तक आगे बढ़ाने का जो निर्णय लिया है उससे डॉक्टरों एक तरफ जहां मानसिक रुप से परेशान हो रहे हैं वहीं आर्थिक, एकेडेमिक और वित्तीय नुकसान भी झेल रहे हैं.

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डॉक्टरों को कोविड ड्यूटी के बाद किसी तरह का रेस्ट नहीं मिल रहा है. लगातार काम करते हुए मानसिक परेशानी झेल रहे हैं. ऐसे में उनका मांग है कि 7 दिन बाद डॉक्टरों को क्वारंटाइन लीव जरुर दी जाए ताकि वो अपनी सेहत का भी ख्याल रख सकें. वहीं सरकार ने बीते साल घोषणा की थी कि डॉक्टरों को 5000 रुपये का कोविड इंसेंटिव और हार्ड ड्यूटी अलाउंस दिया जाएगा जो आजतक जारी नहीं किया गया है. इसे भी सरकार अतिशीघ्र जारी करे.

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