सालों से इस इंतजार में है अतिथि अध्यापक

नई दिल्ली. दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने अतिथि अध्यापकों को अबतक अंधेरे में रखा है. अतिथि अध्यापकों का भविष्य अंधकार में लटका हुआ है. शिक्षक संघ का कहना है कि सरकार 2014 में कुछ वादे करते हुए सत्ता में आई थी. मगर अबतक उन वादों पर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है.

कोरोना में छात्रों की पढ़ाई के लिए नियुक्त हो शिक्षक

इस संबंध में ऑल इंडिया गेस्ट टीचर एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण डेढ़ा ने बताया कि दिल्ली सरकार ने चुनावों के दौरान वादा किया था कि अतिथि अध्यापकों को स्थायी नियुक्ति दी जाएगी. मगर सात साल बाद भी अबतक अतिथि अध्यापक स्थायी नहीं किए गए है. सरकार ने वादा किया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक हर शिक्षक को समान कार्य समान वेतन के आधार पर वेतन का भुगतान होगा. मगर आज भी अतिथि शिक्षक दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करने को मजबूर है.

शिक्षकों की बहाली के लिए ट्विटर पर घमासान

एसोसिएशन का कहना है कि अतिथि अध्यापकों को महीने में एक या दो अवकाश मिलना चाहिए, मगर उन्हें किसी तरह का अवकाश नहीं दिया जाता. महिला अतिथि अध्यापिकाओं को मातृत्व अवकाश दिए जाने से संबंधित किसी तरह की स्पष्ट गाइलाइन्स भी सरकार द्वारा नहीं निर्देशित की गई है. आलम ये है कि छह महीने की जगह तीन महीने का मातृत्व अवकाश महिला अतिथि अध्यापिकाओं को दिया जा रहा है.

राहत! अब शिक्षकों का होगा वैक्सीनेशन

सरकार के अन्य वादे के मुताबिक दिल्ली के अतिथि अध्यापकों को नौकरी से नहीं हटाए जाने की बात की गई थी. मगर 2014 से पीएफसी ट्रांसफर, प्रमोशन या कई अन्य कारणों से सैंकड़ों अतिथि अध्यापकों की नौकरी जा रही है. अतिथि अध्यापक अपने साथ हो रहे अन्याय से परेशान है.

मुसीबत, बिना पहचान पत्र कैसे काम करें शिक्षक

स्कूलों छात्रों की पढ़ाई के अलावा समय समय पर कई अन्य महत्वपूर्ण कार्य किए जाते है. इसमें समर कैंप, मिशन बुनियाद या विद्यालय में खेलकूद का कार्यक्रम या बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट आदि आम है. इन सभी दिशाओं में दिल्ली के अतिथि अध्यापकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसके बाद भी सरकार से अपेक्षित व्यवहार सहना पड़ रहा है. अतिथि अध्यापकों की परेशानियों को सुनने के लिए सरकार राजी नहीं है.

संघ ने सिसोदिया से की मुलाकात, शिक्षकों की मांग रखी सामने

एसोसिएशन ने मांग की है कि सरकार उनकी मांगों पर गौर करे. सरकार से अध्यापकों ने गुजारिश की है कि उनकी मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि वो बेहतर तरीके से नौकरी कर सकें.

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