निगम स्कूलों के साथ भेदभाव कर रही दिल्ली सरकार

नई दिल्ली. दिल्ली नगर निगम के प्राथमिक स्कूलों की सूरत बदहाली में तब्दील होती जा रही है. निगम स्कूलों की बदहाल स्थिति के पीछे एखक बड़ी साजिश होने की संभावना नजर आ रही है. यही कारण है कि बीते पांच सालों में निगम के 50 से अधिक स्कूलों को बंद कर दिया गया है. दिल्ली के शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा दिए जाने की सुविधा नहीं थी. प्राथमिक शिक्षा देना ही निगम स्कूलों का काम है.

शिक्षक भर्ती के लिए लाखों अभ्यार्थियों को इंतजार

ये कहना है शिक्षक नगर न्याय मंच के अध्यक्ष कुलदीप खत्री का. हालांकि शिक्षा निदेशालय के भी स्कूल हैं जो कि पहली कक्षा से चलते है. मगर इन स्कूलों को शुरु करने के पीछे बहुत सोच विचार किया गया. आलम ये है कि निदेशालय द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य मदों के नाम पर लाखों की राशि खर्च की जाती है. इसी की बदौलत वो प्राइवेट स्कूलों से टक्कर ले पाते है. वहीं जब निगम के स्कूलों का नाम आता है तो आज के समय में निगम स्कूलों को सालाना 50 हजार रुपये ही खर्च करने के लिए दिए जाते है.

निगम स्कूलों के प्रिंसिपल को मिलेगा अब ट्रांसफर, लागू हुआ आदेश

वहीं निगम स्कूलों की खस्ता हालत के कारण यहां छात्रों की संख्या में भी गिरावट देखने को मिल रही है. इस गिरावट का अब राजनीतिक लाभ उठाने में भी पार्टियां पीछे नहीं है. वहीं दिल्ली में जिस तरह की शिक्षा नीति चल रही है वो एक तरफ दिल्ली के सरकारी स्कूलों को शिक्षा मॉडल के तौर पर दिखा रही है वहीं निगम के स्कूलों की हालत जरजर होती जा रही है.

सालों से इस इंतजार में है अतिथि अध्यापक

अपने स्कूलों को बदलती तस्वीर दिखा कर दिल्ली सरकार वाहवाही लूटने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है. हालांकि ये सच्चाई है कि दिल्ली सरकार के स्कूलों की हालत पहले की अपेक्षा बेहतर हुई है. मगर उन्हें ये भी सोचना चाहिए कि निगम के स्कूलों में भी गरीब तबके के बच्चे पढ़ते हैं. सरकार ने कभी निगम के स्कूलों की सुध लेने पर विचार नहीं किया है.

राहत! अब शिक्षकों का होगा वैक्सीनेशन

शिक्षक न्याय मंच नगर निगम के अध्यक्ष कुलदीप खत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ाने वाले हर शिक्षक को बीते तीन सालों से टैब और इंटरनेट की सुविधा दी जा रही है. मगर दिल्ली सरकार निगम स्कूलों के साथ भेदभाव कर रही है. यही कारण है कि दिल्ली सरकार के जो आदेश निगम स्कूलों में भी लागू होते हैं, वहीं इस आदेश को निगम में लागू नहीं करवाया गया.

निगम का फरमान, शिक्षक और छात्र परेशान

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों और निगम के शिक्षकों में भी फर्क किया जाता है. जबकि निगम के शिक्षक भी बच्चों को अच्छा नागरिक बनाने और उनके भविष्य को उज्जवल करने के उद्देश्य से काम करते है. निगम के स्कूलों में पढ़ने वाले 80% छात्रों के पास एंड्रॉयड फोन की सुविधा नहीं है. वहीं बीते डेढ़ साल से जब से स्कूलों को बंद किया गया है तभी से निगम स्कूलों में पढ़ाई कैसे होती है सरकार ने इसकी कोई सुध नहीं ली.

शिक्षकों को मिले 50 लाख का मुआवजा, वीडियो में देखे मांग

एक तरफ निगम प्रशासन आर्थिक तंगहाली झेल रहा है. निगम के पास कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए भी पर्याप्त मात्रा में राशि नहीं है. कर्मचारियों को सालों से एरियर्स और सैलरी का भुगतान नहीं किया गया है. दिल्ली सरकार और शिक्षा निदेशालय के स्कूलों में बीते छह सालों में काफी अंदर आया है. अगर इन्हें बराबर करने पर विचार नहीं किया गया तो भविष्य में शिक्षा के लिए चलाई जा रही ये दोहरी नीति बहुत बुरा असर डालेगी.एरियर्स और सैलरी का भुगतान नहीं किया गया है. दिल्ली सरकार और शिक्षा निदेशाल के स्कूलों में बीते छह सालों में काफी अंतर आया है. अगर इन्हें बराबर करने पर

The Depth

TheDepth is India's own unbiased digital news website.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: