सांसद साहब ने पेश की इंसानियत की मिसाल, अनाथ बच्चों की मदद के लिए बढ़ाया हाथ

इन दिनों पूरा देश कोरोना महामारी की मार झेल रहा है. कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए आम आदमी से लेकर कई नेता, सामाजिक लोग और सेलेब्स लोगों की मदद के आगे आ रहे हैं. इनमें सोनू सूद और यूथ कांग्रेस प्रेसिडेंट श्रीनिवास बीवी का नाम सबसे ऊपर है. ये लोग 24 घंटे, सातों दिन लोगों की मदद कर रहे हैं. कई ऐसे लोग भी हैं जो काम तो करते हैं लेकिन सुर्खियां नहीं बटोरते. ऐसा ही एक नाम है बस्तर के सांसद दीपक बैज का.

दरअसल, सांसद साहब ने इंसानियत की मिशाल पेश करते हुए अनाथ हुए बच्चों को सहारा दिया है. पूरी घटना छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की है, जहां पर कोरोना से एक दंपति की मौत हो गई और उनके दो बच्चे अनाथ. लेकिन सांसद साहब का ह्रदय इस घटना से पसीज गया और वह इन मासूमों के मसीहा बनकर सामने आ गए.

बस्तर में किराए के मकान रहता था परिवार

बस्तर से सांसद दीपक बैज ने बताया कि दिवंगत टीचर दंपति मूलतः रायगढ़ जिले के थे. लेकिन वह बस्तर के बड़े किलेपाल (बास्तानार) में कार्यरत थे. ये परिवार यहां पर किराए के मकान के रहता था. पति-पत्नी दोनों ही कोरोना पॉजिटिव थे. पत्नी दोनों बच्चों के साथ घर पर ही आइसोलेशन में थीं जबकि पति डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे. बीते शनिवार रात को उनकी मृत्यु हो गई. पति की मौत की खबर पता लगने के बाद पत्नी भी चल बसी. टीचर दंपति अपने पीछे दो मासूमों जिनकी उम्र अभी महज 5 साल और 2 साल है.

सांसद ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने पर संबंधित सीएमओ व अन्य अधिकारियों से बात कर टीचर दंपति का जगदलपुर में अंतिम संस्कार कराया गया. बच्चों का भी कोरोना टेस्ट कराया गया. इनकी टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद इन्हें इनकी दादी और चाचा के हवाले किया गया.

कांग्रेस सांसद बैज ने इस संबंध में एक ट्वीट भी किया. जिसमें उन्होंने लिखा, ”बड़े किलेपाल(जिला बस्तर)में कार्यरत शिक्षक दंपति कि कोरोना से मौत हो गई है,इस घटना से मैं बेहद दुखी हूं,वह अपने पीछे दो मासूमों (पल्लवी 5 वर्षीय और उमेश 2 वर्षीय) को छोड़ गए हैं. इनकी मदद के लिए मैंने अपनी एक माह की वेतन की 50% राशि इन बच्चों को समर्पित करता हूं और आगे भी मदद करूँगा.’

संसद वेतन का देंगे 50 फीसदी

सांसद ने कहा कि ये एक ह्रदयविदारक घटना है. बच्चों का भविष्य अभी अंधकारमय है. बिना मां-बाद के बच्चों का जीवन काफी कठिन है. हम इनके मां-बाप को वापिस तो नहीं ला सकते लेकिन मदद के लिए हाथ तो बढ़ा ही सकते हैं जिससे इन बच्चों का जीवन कुछ हद तक रोशन हो सके. इसलिए मैं अपने एक माह के वेतन का 50 फीसदी इन्हें देने का फैसला किया है. साथ ही इनका जीवन सेटल होने तक जैसे-जैसे मदद की जरूरत पड़ेगी, हम मदद करेंगे. इसके अलावा राज्य के मुख्यमंत्री, संबंधित एमएलए और स्थानीय प्रशासन से भी इस संबंध में बात करेंगे. हमारी कोशिश रहेगी कि कैसे भी इन बच्चों को जीवन सेटल करा सकें.

ट्वीटर पर खूब हुई तारीफ

दीपक बैज के इस काम की सोशल मीडिया, खासकर ट्वीटर पर खूब तारीफ हुई. यूजर्स ने इनकी सराहना करते हुए लिखा कि नेता हो तो ऐसा. किसी ने इन्हें सैल्यूट किया तो किसी ने इन्हें देवदूत बताया.

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