लाइब्रेरियन 11 साल से कर रहे नौकरी का इंतजार

नई दिल्ली. बिहार सरकार को युवाओं ने रोजगार के मुद्दे पर चारों ओर से घेर लिया है. युवा कभी शिक्षक बहाली की मांग करते हैं तो कभी ट्रांसेलटर भर्ती की. अब लाइब्रेरियन भर्ती को लेकर भी युवाओं ने सवाल उठाने शुरु कर दिए है.

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ऑल बिहार ट्रेंड लाइब्रेरियन एसोसिएशन के मुताबिक 2008 के बाद से बिहार में लाइब्रेरियन की भर्ती नहीं की गई है. माध्यमिक स्कूल, हाई स्कूल हो या फिर कॉलेज कहीं भी लाइब्रेरियन की भर्ती नहीं हुई है. खास बात है कि बिहार की अधिकतर यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में लाइब्रेरी साइंस का कोर्स करवाया जाता है. मगर दुर्भाग्य है कि राज्य में लाइब्रेरियन की पोस्ट ही नहीं निकाली गई है. ऐसे में कोर्स करवाने का आधार नहीं है.

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एसोसिएशन के मुताबिक माध्यमिक विद्यालय में कुल 76 हजार पोस्ट, हाई स्कूल मे 35 हजार पोस्ट है. सरकार ने 2010 में आखिरी बार लाइब्रेरियन पद की पोस्ट निकाली थी. उसके बाद से अबतक कोई नियुक्ति नहीं की गई है और न हो पोस्ट निकाली गई है. एसोसिएशन के सीतामढ़ी जिले के अध्यक्ष अभिषेक रंजन ने बताया कि पहले जो पोस्ट आई थी उसमें 5500 पोस्ट निकाली गई थी. मगर भर्ती और बहाली सिर्फ 850 लाइब्रेरियन की हुई.

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हर साल कई लाइब्रेरियन रिटायर होते हैं. मगर सरकार आंख बंद करे बैठी है इसलिए कोई नहीं बहाली नहीं निकालती. उन्होंने कहा कि राज्य में लाइब्रेरियन का बहुत बुरा हाल है. सरकार के बेसुध व्यवहार के कारण ही आज राज्य कई जगह अनट्रेन्ड लोग लाइब्रेरी संभाल रहे हैं. ऐसे में लइब्रेरी का हाल सोचा जा सकता है.

राज्य में है पुस्तकालय अधिनियम

एसोसिएशन की मानें तो राज्य में पुस्तकालय अधिनियम भी बनाया हुआ है. 2008 में सरकार ने इसे लागू किया है. इसके तहत वर्ष 2008 में प्रदेश के हाई स्कूलों में पुस्तकालय अध्यक्ष के लिए 2547 पद निकाले गए थे. इनमें से 1896 पदों पर नियुक्ति हो पाई. इसका बाद बचे हुए 651 पदों पर नियुक्तियां नहीं हुई.

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एसोसिएशन के मुताबिक राज्य में 7000 से अधिक माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूल है. इनमें से सिर्फ 2547 स्कूलों में ही पुस्कालय अध्यक्ष का पद है. बाकि स्कूलों में पुस्कालय अध्यक्ष का पद है ही नहीं. सरकार को चाहिए की वो राज्य में लाइब्रेरी पदों को निकाले और नियुक्तियां करे.

ये हैं मांगे

एसोसिएशन का कहना है कि जिन स्कूलों में पुस्तकालय अध्यक्ष का पद नहीं बना है वहां इसे बनाया जाए. इसी के साथ इस पद पर नियुक्तियां कराई जाए. राज्य के अभिलेखागार में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के छात्रों को नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाए क्योंकि ये अभिलेख संधारण में अच्छा काम करते है. राज्य में अव्यवस्थित संग्रहालय, चिकित्सा महाविद्यालय, नर्सिंग कॉलेज आदि में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के छात्रों को नियुक्ति मिले.

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राज्य में सार्वजनिक पुस्तकालयों की संख्या बढ़ाई जाए, रिक्त पदों पर नियुक्ति हो, जिन कॉलेजों में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान की पढ़ाई होती है वहां स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति भी की जाए. इन सभी मांगों को लेकर एसोसिएशन ने राज्य भर में अलग अलग संबंधित पदाधिकारियों और नेताओं को सौंपा है.

राजद ने उठाया मुद्दा

राज्य में लाइब्रेरियन की कमी का मुद्दा राष्ट्रीय जनता दल की सदस्य ऋतु जायसवाल ने भी उठाया है. इस संबंध में उन्होंने ट्वीट किया कि 2008 में लाइब्रेरियन पद के लिए जो रिक्ति आई थी उसमें से 651 पद आज भी खाली हैं. 13 वर्षों से कोई नई वेकेंसी नहीं आई जबकि 8000 पद से ज्यादा खाली हैं. बिहार के युवा योग्यता हासिल करने के बाद भी बेरोजगार हैं. इनकी वेदना को समझिए नीतिश कुमार जी.

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