तैयार हुई सबसे लंबी रोड टनल, पीएम मोदी करेंगे उद्धाटन

नई दिल्ली. दुनिया की सबसे लंबी रोड टनल भारत में बनकर तैयार हो गई है. 10 हजारी फीट की उंचाई पर बनाई गई ये टनल कई मायनों में खास है. इस टनल को पूरा होने में पूरे 10 सालों का समय लगा है. अब जब ये टनल बनकर तैयार हो गई है तो लद्दाख से सालभर तक जुड़े रह सकेंगे. इस टनल के बनने से मनाली और लेह के बीच की दूरी भी 46 किलोमीटर तक कम हो गई है. इस टनल के मदद से सिर्फ 10 मिनट में लेह से मनाली का सफर तय हो सकेगा.

इस टनल का नाम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा गया है. इसे 10,171 फीट की उंचाई पर बनाया गया है. इसका नाम अटल रोहतांग टनल (Atal Rohtang Tunnel) है जिसे रोहतांक के पास से जोड़कर बनाया गया है. इस टनल की खासियत है कि ये दुनिया की सबसे उंची औप सबसे लंबी रोड टनल है. इसकी लंबाई 8.8 किलोमीटर है.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मनाली-लेह रोड पर चार और टनल प्रस्तावित हैं. अभी अटल टनल (Atal Rohtang Tunnel) बनकर तैयार है. ऐसी संभावना जताई गई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) खुद इस टनल का उद्घाटन करेंगे. ये टनल मनाली और लेह को जोड़ने के अलावा हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पिति में भी यातायात को आसान बनाएगी. इस टनल के शुरू होने के बाद कुल्लू का मनाली भी लाहौल स्पिति से जुड़ जाएगा.

सैनिकों को मिलेगा लाभ

इस टनल के बनने से सबसे अधिक लाभ भारतीय सैनिकों को होगा. इस टनल के शुरु होने से सर्दियों के मौसम में भी हथियार और रसद की आपूर्ति आसानी से पूरी हो सकेगी. अब सिर्फ जोजिला पास के भरोसे ही बैठना नहीं पड़ेगा. इस टनल के जरिए भी सैनिकों तक सामान की सप्लाई की जा सकेगी. जानकारी है कि इस टनल में वाहन 80 किलोमीटर की रफ्तार से चल सकेगा. ये टनल 2010 में बनना शुरू हुआ था.

इस टनल को बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने बनाया है. इस सुरंग को घोड़े की नाल के आकार का बनाया गया है. इतनी उंचाई पर इस टनल को बनाना भी कोई आसान काम नहीं था. इसे बनाने में BRO के इंजीनियरों व अन्य कर्मचारियों का काफी मेहनत और मशक्कत करनी पड़ी.

सर्दियों के समय इस टनल पर काम करना बेहद मुश्किल होता था क्योंकि यहां तापमान 30 डिग्री तक पहुंचता था. इस टनल को बनाने के लिए पहले इस क्षेत्र से 8 लाख क्यूबिक मीटर पत्थर और मिट्टी निकाली गई. गर्मियों के दिनों में टनल में पांच मीटर खुदाई रोजाना होती थी मगर सर्दियों में ये खुदाई आधी हो पाती थी.

एक्सपर्ट्स की मानें तो इस टनल को इस तरीके से बनाया गया है कि इसके अंदर एक साथ 3000 कारें या 1500 ट्रक निकल सकते हैं. इस महत्वपूर्ण टनल को बनाने में लगभग 4 हजार करोड़ रूपये की लागत आई है. टनल में अंदर अत्याधुनिक ऑस्ट्रेलियन टनलिंग मेथड का उपयोग किया गया है. वेंटिलेशन सिस्टम भी ऑस्ट्रेलियाई तकनीक पर आधारित है.

इस टनल की डिजायन बनाने में DRDO ने भी मदद की है ताकि बर्फ और हिमस्खलन से इस पर कोई असर न पड़ सके. किसी भी मौसम में इस टनल का यातायात बाधित न हो. इस टनल के अंदर भी एक निश्चित दूरी पर सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे, जो स्पीड और हादसों पर नियंत्रण रखने में मदद करेंगे. इसके साथ ही टनल के अंदर हर 200 मीटर की दूरी पर एक फायर हाइड्रेंट की व्यवस्था की है ताकि, आग लगने की स्थिति में नियंत्रण पाया जा सके.

पंजाब यूनिवर्सिटी और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च ने इस टनल में वैज्ञानिक प्रयोग करने के लिए न्यूट्रीनो डिटेक्टर लगाने की अनुमति भी सरकार से मांगी है. कहा जा रहा है कि अब इस टनल के माध्यम से पहाड़ों पर लगने वाले जाम से बचा जा सकेगा. मनाली से लेह तक जाने में ये सुरंग काफी समय बचाएगी.

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