अबतक 1300 से अधिक डॉक्टरों ने गंवाई जान

नई दिल्ली. कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर बहुत भयावह साबित हुई है. मरीजों की जान बचाने के लिए सबसे आगे खड़े डॉक्टर भी इस लहर से बच नहीं पाए. दूसरी लहर में जितने डॉक्टर्स कोरोना संक्रमण की चपेट में आए वो आंकड़े बहुत परेशान करने वाले हैं.

कोरोना संक्रमण से 850 से अधिक डॉक्टरों ने गंवाई जान

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के मुताबिक दूसरी लहर में 550 डॉक्टरों की जान कोरोना संक्रमण के कारण गई है. IMA ने हाल ही में ये आंकड़ा जारी किया है. इसमें ये जानकारी भी दी गई कि किस राज्य में कितने डॉक्टरों की मौत हुई है. इसमें सबसे भयावह आंकड़ा देश की राजधानी दिल्ली का है. यहां कुल 104 डॉक्टर कोरोना की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं. इसके बाद बिहार में भी हालात बहुत गंभीर है. यहां कुल 96 डॉक्टरों की जान गई है.

उत्तर प्रदेश में 53 की हुई मौत

ताजा आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के कारण अबतक 53 डॉक्टरों की जान जा चुकी है. इसके बाद राजस्थान में 42 डॉक्टरों की मौत हो चुकी है. ये सभी आंकड़े कोरोना संक्रमण की दूसरी वेव के हैं. इसमें 22 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़े शामिल हैं. इसके अलावा एक जगह की जानकारी नहीं है. यहां एक डॉक्टर की मौत हुई है.

800 डॉक्टरों की गई पहली वेव में जान

डॉ. हरजीत सिंह भट्टी, नेशनल प्रेजिडेंट, प्रोग्रेसिव मेडिकोस एंड साइंटिस्ट्स फोरम के मुताबिक कोरोना सक्रमण की दूसरी वेव में 550 डॉक्टर अपनी जान गंवा चुके हैं. जबकि इससे पहले आई वेव में देशभर में 800 डॉक्टर की जान गई थी. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को संक्रमण का सबसे अधिक खतरा होता है. यही कारण है कि इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टर संक्रमित हो रहे है और उनकी जान जा रही है. अबतक कुल 1350 डॉक्टर कोरोना की भेंट चढ़ चुके है.

अब डरा रहा छिपकली में मिलने वाला फंगस

डॉ. हरजीत सिंह भट्टी ने कहा कि इस समय सरकार का पूरा जोर कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने पर होना चाहिए. इसके अलावा टेस्टिंग, आइसोलेशन की प्रक्रिया को पूरा करने पर जोर दिया जाना चाहिए. यही नहीं अस्पतालों में जिस तरह इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी हो रही है, उसे पूरा करने के लिए सरकार को बेहतर कदम उठाने चाहिए.

डॉक्टरों की भी सुने

उन्होंने बताया कि डॉक्टर मरीज का इलाज कर रहे हैं और खुद भी संक्रमित हो रहे हैं. अस्पतालों की हालत इस समय डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ से बेहतर कोई नहीं जानता. ऐसे में सरकार को डॉक्टरों की बात सुननी चाहिए. मगर इन दिनों सरकार और मेडिकल फ्रेटर्निटी के बीच एक कम्यूनिकेशन गैप बन गया है. सरकार तो ये तक मानने को तैयार नहीं है कि इतने डॉक्टरों की जान कोरोना संक्रमण के कारण गई. सरकार इन्हें वॉरियर तक मानने को तैयार नहीं है.

ब्लैक फंगस में ब्लड शुगर चैक करना है क्यों है जरूरी, डॉक्टर से जानें

इस समय प्रशासन और सरकार के साथ डॉक्टरों की सीधी कोई बात नहीं हो रही है. इसका हरजाना सबसे अधिक डॉक्टरों को उठाना पड़ रहा है. एक तरफ वो साल भर से अधिक समय से बिना छुट्टी के कोरोना में ड्यूटी कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ अपनी जान जोखिम में डालते हुए बिना किसी बीमा और सुरक्षा कवर के मरीजों की जान बचाने में जुटे हैं.

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