अपनी बुराईयों को दूर करने की प्रेरणा है “अंगार” के “कर्म” में

नई दिल्ली. दुनिया के हर व्यक्ति में कोई न कोई बुराई होती ही है. चाहे वो छोटी हो या बड़ी मगर बुराइयां भी इंसान के व्यक्तित्व का हिस्सा होती है. आमतौर पर लोग अपनी बुराइयों के बारे में बात करने से हिचकते है. लोग चाहते है कि उनके अंदर की बुराइयां खत्म हो जाए.

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इन बुराइयों और इंसान की सोच को लेकर अब एक नया गाना लेकर आए हैं “अंगार”. इस नए गाने का प्रीमियर पांच जून को लॉन्च किया जा चुका है. जबकि पूरा गाना 10 जून को लॉन्च होने वाला है. इस गाने के जरिए “अंगार” यानी शिवांग भट्ट लोगों को फिर से एक मैसेज देना चाहते है. उनका कहना है कि अपने अंदर की खामियों को पहचानना, उनसे लड़ना बहुत मुश्किल काम है. गाना सुनने के लिए यहां क्लिक करें

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अपनी खामियों को दूर करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है. सिर्फ यही नहीं इसके लिए एक बड़ी किमत भी कई बार अदा करनी पड़ जाती है. अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मैं अपनी एनर्जी को लिखने में लगाता हूं. इसी के जरिए मेरा व्यक्तित्व निखरता है. इससे मेरी एनर्जी एक सुव्यवस्थित ढंग से सही जगह इस्तेमाल होती है. लिखने से मुझे मानसिक शांति और सकारात्मकता भी मिलती है.

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ये नया गाना “कर्म” भी इन्हीं सब विषयों पर आधारित है. इसमें मैंने कोशिश की है कि अपने अंदर की बुराइयों से लड़ने की हर तरह की कोशिश को साझा कर सकूं. उन्होंने कहा कि बुराइयों से लड़ना अंदर और बाहर दोनों से जरुरी होता है. तभी असल व्यक्तित्व निखर कर बाहर आता है.

खुद निभाई पूरी जिम्मेदारी

उन्होंने कहा कि ये पहला मौका है जब गाने से जुड़े हर पहलू में वो शामिल रहे है. “कर्म” के शब्दों को रुप देने में, इसके खुबसूरत निर्देशन में और इसकी वीडियो में एक्टर के तौर पर हर जगह अंगार ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. अबतक गाने और लिरिक्स लिखने वाले अंगार ने इस बार डायरेक्शन में भी अपना हाथ आजमाया है.

सोशल मुद्दों गाने लिखने का है शौक

उन्होंने बताया कि वो गाने लिखते आ रहे है. इससे पहले वो अलग अलग सामाजिक मुद्दों पर गाने लिखते रहे है. अंगार का मानना है कि जितनी क्रिएटिविटी के साथ लोगों तक अपनी बात पहुंचाई जाए लोग उसे याद रखते है. आजकल गाने एक ऐसा जरिया है जो आसानी से लोगों की जुबान पर चढ़ जाते है. ऐसे में अच्छाई और बुराई के बारे में बताने के लिए इस जरिए का इस्तेमाल वो कर रहै है.

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