इन डॉक्टरों को भी दें कोरोना ड्यूटी का मौका

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण में जैसे जैसे मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है वैसे ही अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी भी सामने आ रही है. सिर्फ स्वास्थ्य सेवाएं ही नहीं बल्कि अब डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की कमी भी होने लगी है. ऐसे में मौजूदा स्टाफ पर काम का काफी अधिक प्रेशर आने लगा है.

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इसी बीच ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने मांग की है कि 50 हजार फॉरन मेडिकल ग्रेजुएट डॉक्टरों को भी कोविड ड्यूटी के लिए लगाया जाए. इस संकट के समय में जरूरी है कि इन डॉक्टरों को औपचारिकताएं हटाते हुए कोरोना ड्यूटी करने की अनुमति दी जाए ताकि मरीजों का इलाज हो सके. इस संबंध में एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है.

एसोसिएशन के डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि देशभर के अधिकतर मेडिकल एसोसिएशन भी इस मांग का समर्थन कर रहे हैं. इस समय जिस त्रास्दी से देश जूझ रहा है उस समय अधिक से अधिक लोगों की जरुरत मेडिकल फ्रेटर्निटी को है.

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ऐसे में अगर इस समय फॉरन मेडिकल ग्रेजुएट्स को बिना एग्जाम लिए प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन देकर ड्यूटी करने की अनुमति दी जाए तो कई मरीजों के इलाज में मदद मिल सकती है. इसी के साथ एसोसिएशन की मांग है कि साल भर की कोविड ड्यूटी सफलता पूर्वक पूरी करने के बाद इन डॉक्टरों को नेशनल मेडिकल कमिशन और राज्य मेडिकल काउंसिल द्वारा स्थाई रजिस्ट्रेशन दिए जाने की व्यवस्था भी की जाए. इसी के साथ एफएमजीई एग्जाम से भी छूट दी जाए.

और भी हैं मांगे

एसोसिएशन के मुताबिक सरकार इन दिनों कोविड ड्यूटी के लिए फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स से भी ड्यूटी करवा रही है. ऐसे में एसोसिएशन की मांग है कि फाइनल ईयर के स्टडेंट्स को पहले ट्रेन किया जाए. इसी के साथ इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपंड कम से कम 20 हजार रुपये किया जाए. वहीं इंटर्न डॉक्टर जो कोविड ड्यूटी कर रहे हैं उन्हें भी वैक्सीनेशन लगाई जाए.

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अबतक कई इंटर्न डॉक्टरों को वैक्सीनेशन नहीं लगाया गया है. ऐसे में उनकी सुरक्षा का ख्याल भी रखा जाए. इतना ही नहीं अधिकतर इंटर्न डॉक्टर कोविड में ड्यूटी दे रहे हैं. ऐसे में सरकार उनका कम से कम 50 लाख का इंश्योरेंस करे. इसी के साथ डॉक्टरों के हइजीन व सुरक्षा का ख्याल भी सरकार रखे.

हेमा मालिनी ने भी लिखा पत्र

इस संबंध में सांसद हेमा मालिनी ने भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कहा था कि एफएमजी को कोरोना मरीजों का इलाज करने की अनुमति दी जाए. सांसद के मुताबिक जिले में ऐसे कई डॉक्टर हैं जिनकी सेवाओं का उपयोग संकट की इस घड़ी में लिया जा सकता है. ऐसे डॉक्टरों की सेवाओं से कोरोना मरीजों के इलाज में बड़ी सरहायता मिलेगी.

इसलिए जरूरी है एमसीआई परीक्षा

जानकारी के मुताबिक देश के बाहर किसी मेडिकल इंस्टीट्यूट से प्राइमरी मेडिकल क्वालिफिकेशन की डिग्री ली जाती है. इस डिग्री को पास करने वाले डॉक्टर को एमसीआई या किसी राज्य में प्रैक्टिस करनी है तो उसके लिए उन्हें चिकित्सा परिषद में प्रोविजन या स्थायी रूप से पंजीकरण कराना होता है.

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उसे एमसीआई द्वारा राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई) के जरिए संचालित की जाने वाली जांच परीक्षा पास करने की जरुरत होती है. इस जांच परीक्षा को ही फॉरन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन यानी एफएमजीई कहा जाता है.

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