चेतावनी!!! पीजी रेजिडेंट का हो एग्जाम, नहीं तो होगी हड़ताल

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण काल के दौरान डॉक्टर एक साथ कई मरीजों की देखभाल कर रहे हैं. डॉक्टरों पर मरीजों का दबाव कई गुणा बढ़ गया है. इसी बीच देखने में आ रहा है कि सरकार जिन डॉक्टरों से कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करवा रही है उन्हीं डॉक्टरों की सुध लेने की नहीं पड़ी है.

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अब राजस्थान के अजमेर के डॉक्टरों ने भी राज्य सरकार को अपनी मांगों को मानने के लिए अंतिम चेतावनी दी है. डॉक्टरों का कहना है कि राज्य सरकार उनकी मांगो पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. डॉक्टर मानसिक और शारीरिक रुप से काम कर कर के थक चुके हैं. मगर सरकार को डॉक्टरों के स्वास्थ्य और उनके परिवार की कोई चिंता नहीं है.

स्वास्थ्य मंत्री को लिखा पत्र

डॉक्टरों का कहना है कि न ही सरकार को अस्पतालों में सुविधाएं दुरुस्त करने में दिलचस्पी है और न ही डॉक्टरों की जान की परवाह. इसका नतीजा है कि अब अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा चुकी हैं. इन सभी खामियों के बीच भी डॉक्टर मरीजों की जान बचाने में पुरी कोशिशें कर रहे हैं. इसी बीच अजमेर स्थित जवाहरलाल नेहरु मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा को पत्र लिखकर अपनी मांगों से अवगत करवाया है.

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इसी के साथ ये चेतावनी भी दी है कि अगर 17 मई तक उनकी मांगो का निराकरण नहीं किया गया तो डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल करने को मजबूर होंगे. कोरोना काल में डॉक्टर एसोसिएशन की तरफ से ऐसी चेतावनी मिलना बहुत गंभीर है. मगर सरकार की ओर से अबतक डॉक्टरों को कोई आश्वासन नहीं मिल सका है.

मानसिक तौर पर न करें प्रताड़ित

इस संबंध में एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. गोवर्धनलाल सैनी से बात की. उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण काल में ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों के साथ सरकार सिर्फ दुर्व्यवहार कर रही है. सरकार से रेजिडेंट डॉक्टरों ने कुछ मुख्य मांगें की है. इसमें तीसरे वर्ष के पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों की परीक्षा तारीखें बढ़ाए जाने पर रोक लगाने की मांग की गई है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर परीक्षा की तारीख 4 महीने के लिए बढ़ेगी तो पीजी छात्रों को मानसिक रुप से प्रताड़ित होना पड़ेगा.

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ऐसे में डॉक्टरों ने मांग की है कि 2018 के बैच का फाइनल एग्जाम मई के अंत में ही लिया जाए. अगर ऐसा नहीं होता है तो डॉक्टरों को वन टाइम रिलैक्सेशन देते हुए उन्हें प्रमोट किया जाए. इस कदम से रेजिडेंट डॉक्टरों का मानसिक, आर्थिक, एकेडेमिक और वित्तीय नुकसान होने से बचेगा.

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इसके अलावा डॉक्टरों ने मांग की है कि जिन रेजिडेंट डॉक्टरों की 3 वर्षों की अवधि पूर्ण हो चुकी है उन्हें उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर एग्जाम के लिए योग्य भी माना जाए. सरकार ने बीते वर्ष कोरोना इंसेंटिव राशि जो कि 5000 रुपये है उसे जारी करने की बात कही थी मगर दुर्भाग्यपूर्ण है कि ये राशि अबतक जारी नहीं की गई है. ऐसे में सरकार इस राशि को जारी करे. जो डॉक्टर कोविड ड्यूटी कर रहे हैं उन्हें हॉर्ड अवाउंस भी जारी किया जाए. रेजिडेंट चिकित्सकों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी हो.

हाथ पर काली पट्टी के साथ ड्यूटी को मजबूर

बता दें की सरकार ने अगर डॉक्टरों की मांगें नहीं मानी तो डॉक्टर एसोसिएशन ने तय किया है कि आगामी 17 मई से वो काम बंद जैसे कठोर कदम उठा सकते हैं. वहीं 13 मई तक डॉक्टर हाथ पर काली पट्टी बांध कर काम करने को मजबूर हैं. वहीं 14 से 16 मई तक रोजाना सुबह एक घंटे तक काम का बहिष्कार करने की चेतावनी भी डॉक्टरों ने दी है.

बीकानेर के डॉक्टर भी हैं परेशान

राजस्थान में डॉक्टरों का ऐसा हाल सिर्फ अजमेर में ही नहीं है. बल्कि बिकानेर के डॉक्टरों के साथ भी ऐसा ही दुर्व्यवहार किया जा रहा है. एसपी मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. महिपाल नेहरा ने बताया कि कोविड ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों को हार्ड ड्यूटी अवाउंस और स्टाइपंड में बढ़ोतरी की मांग की जा रही है. डॉक्टरों से लगातार कोविड ड्यूटी कराई जा रही है जिससे उनका मनोबल टूटने लगा है.

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उन्होंने कहा कि डॉक्टर अपना काम नहीं रोकेंगे ताकि किसी मरीज को परेशानी न हो. मगर आने वाले दिनों में एक घंटे तक कार्य नहीं करेंगे. वहीं अगर सरकार हमारी मांगों पर जल्द से जल्द अमल नहीं करती है तो डॉक्टर कठोर निर्णय लेने के लिए विवश हो सकते हैं.

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