पदोन्नति के लिए आयोग की सिफारिशों का पालन करेगा एम्स

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) को हाल ही में एम्स दिल्ली के खिलाफ एक शिकायत मिली थी। जिसमें शिकायतकर्ता का कहना था कि एम्स प्रशासन द्वारा आरक्षित श्रेणी के कर्मचारियों को वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नत नहीं किया जा रहा है। एम्स एससी/एसटी एंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन ने अपनी शिकायत में आयोग से गुहार लगाई थी कि एम्स प्रशासन को डीओपीटी के आदेश दिनांक 15.06.2021 (“आरक्षित श्रेणी पद के लिए आरक्षित श्रेणी” और “अनारक्षित पदों के लिए अनारक्षित श्रेणी” समीक्षा के अधीन) विषय के आधार पर पुनः विचार करते हुए अनुसूचित जाति के वंचित किए गए सभी कर्मचारियों को पदोन्नत किया जाए।
माननीय अध्यक्ष श्री विजय सांपला की अध्यक्षता में हुई सुनवाई के दौरान एम्स प्रशासन को एक्शन टेकन रिपोर्ट आयोग के समक्ष 15 दिनों के भीतर पेश करने का निर्देश दिया गया था। आखिरी सुनवाई के दौरान आयोग अध्यक्ष ने एम्स प्रशासन को निर्देश देते हुए कहा था कि यदि वरिष्ठता / योग्यता के आधार पर पदोन्नति के लिए किसी कर्मचारी की बारी आती है तो आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को भी आरक्षित रिक्तियों के खिलाफ पदोन्नति के लिए विचार किया जाए। ताकि कोई भी अनुसूचित जाति का उम्मीदवार पदोन्नति से वंचित न रहे। आयोग ने यह भी सिफारिश की थी कि एनसीएससी की सिफारिशों के आधार पर किए गए सभी प्रोन्नति, जिसमें “आरक्षित श्रेणी” के उम्मीदवारों को “अनारक्षित” रिक्तियों के खिलाफ पदोन्नति के लिए विचार नहीं किया गया था,  की समीक्षा की जाएगी।
एनसीएससी की सिफारिश के बाद, एम्स ने अब जवाब दिया है कि एम्स प्रशासन अब आयोग की सिफारिशों का पालन करेगा और निर्देशानुसार डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) की मीटिंग करेगा। याचिकाकर्ता भी एम्स के जवाब से संतुष्ट हैं।
माननीय अध्यक्ष श्री विजय सांपला ने कहा कि, वह विभिन्न विभागों में हो रहे इस प्रकार के भेदभावों को लेकर बहुत चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि यदि आगे भी आयोग को इस प्रकार की शिकायत मिलती है तो आयोग अनुसूचित जाति के कर्मचारियों को नियमानुसार पदोन्नति दिलाना सुनिश्चित करेगा।

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