हैरानी! एम्स में सुविधाओं का टोटा

नई दिल्ली. कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के कुछ उपाय ऐसे हैं जिनका सरकार शुरु से प्रचार प्रसार कर रही है. मसलन दो गज दूरी, मास्क लगाना, ग्लव्स का इस्तेमाल करना, सैनेटाइजेशन आदि. मगर गंभीर बात ये है कि सरकार अब कोरोना ड्यूटी कर रहे अपने कर्मचारियों के लिए ही इन सभी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था नहीं कर पा रही है.

कोरोना योद्धा डॉक्टरों की आवाज बनने के लिए इन्होंने उठाई जिम्मेदारी

ऐसी जानकारी मिली है कि इन दिनों कोरोना वायरस काल में डॉक्टरों को भी सरकार अच्छी सुविधाएं मुहैया कराने में असमर्थ साबित हो रही है. हालिया मामला एम्स में देखने को मिल रहा है. दरअसल देश में एम्स के कुछ सेंटर्स में कई तरह की खामियां नजर आ रही है. हालांकि The Depth इन दावों की पुष्टि नहीं करता है.

किन्नरों की जान की नहीं कोई कीमत? वैक्सीन का इंतजार

सूत्रों के मुताबिक इन दिनों अस्पतालों में डॉक्टर पीपीई किट पहन कर ही ड्यूटी दे रहे हैं. मगर देश के सबसे बड़े अस्पताल माने जाने वाले एम्स के कुछ सेंटर्स में भी डॉक्टरों को अच्छे क्वालिटी के पीपीई किट नहीं मिल पा रहे. अच्छी क्वालिटी नहीं होने के कारण डॉक्टरों में सुरक्षा को लेकर संदेह पैदा हो रहा है.

रियूज करने का फरमान

जानकारी मिली है कि डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ आदि को ग्लव्स, फेस शील्ड आदि को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए कहा जा रहा है. अगर एम्स जैसे देश के सबसे बड़े अस्पताल से ऐसी जानकारी मिल रही है तो अन्य अस्पतालों की हालत समझी जा सकती है. पीपीई किट, फेस मास्क इन पर कोरोना वायरस हो सकता है. ऐसे में अगर इन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा तो ये डॉक्टरों की सेहत से खिलवाड़ ही है.

अब ब्लैक फंगस का डर, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण

ऐसा करने से कोविड ड्यूटी कर रहे डॉक्टर व अन्य स्टाफ में काफी भय का माहौल है. सूत्रों का कहना है कि एक तरफ डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मी मरीजों को इलाज मुहैया करा रहे हैं. वहीं उन डॉक्टरों की सेहत के साथ इस तरह का व्यवहार सामने आ रहा है. डॉक्टर हैं परेशान इस मामले पर न ही सरकार कुछ कर रही है न ही एम्स प्रशासन.

सरकार को नहीं चिंता

नाम न बताने की शर्त पर सूत्रों ने बताया कि इन दिनों डॉक्टर और अन्य मेडिकल स्टाफ सबसे अधिक कोरोना संक्रमितों के साथ रहने को मजबूर है. ऐसे समय में सरकार डॉक्टरों के स्वास्थ्य की चिंता तक नहीं कर रही. ऐसे में इलाज करते समय खुद डॉक्टरों में भी भय का माहौल बना हुआ है. उन्हें चिंता ही कि कहीं वो भी कोरोना संक्रमण का शिकार न हो जाएं.

नहीं है कोई चेंजिंग रूम

हैरानी की बात ये भी है कि एम्स जैसे बड़े संस्थान में डॉक्टरों के लिए कोई अलग से चेंजिंग रूम न होने की बात सामने आई है. डॉक्टर एक हॉल सरीखे एरिया में ही अपने पीपीई किट बदलने को मजबूर हैं. ऐसे में डॉक्टरों को इंफेक्शन का भी अधिक खतरा होने का डर सता रहा है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: