मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टरों को मिला आईएमए का साथ

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में इस समय भूचाल आ गया है. प्रदेश के 3000 जूनियर डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया था. इस सामूहिक इस्तीफे को सरकार ने मंजूर कर लिया है. इसके बाद अब जूनियर डॉक्टरों को आदेश मिला है कि जिन्होंने इस्तीफा दिया है वो हॉस्टल भी खाली कर दें.

डॉक्टरों के आगे झुकी दिल्ली सरकार, दोबारा की बहाली

वहीं इस मामले पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कहा कि मध्यप्रदेश में जूनियर डॉक्टर बीते छह महीनों से अपनी मांगों के लिए सरकार से गुहार लगा रहे है. जूनियर डॉक्टरों की मांग है कि उनके लिए अस्पताल में बेड रिजर्व किए जाएं क्योंकि वो मरीजों के सबसे अधिक संपर्क में होते है. इन दिनों जिस तरह से डॉक्टरों के साथ हिंसा की घटनाएं बढ़ी है उसे देखते हुए भी जूनियर डॉक्टर सुरक्षा की मांग कर रहे है. ऐसे ही कई मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर लगातार आवाज उठा रहे है.

परेशान और दुखी अस्पताल स्टाफ के साथ कैसे होगा मरीजों का इलाज

राज्य में डॉक्टरों को अलग अलग तरीकों से डराया और धमकाया जा रहा है. वहीं आईएमए ने इस पूरे मामले की निंदा की है. आईएमए का कहना है कि ये वही स्वास्थ्य कर्मी हैं जिनकी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल लेवल पर तारीफ की थी. कोरोना काल में ऐसे स्वास्थ्यकर्मियों के साथ उत्पीड़न की ये घटना शर्मनाक है.

असम में डॉक्टर को भीड़ ने मारा, डॉक्टरों में नाराजगी

आईएमए ने कहा कि जूनियर डॉक्टरों के साथ राज्य सरकार के व्यवहार का विरोध करते है. यही नहीं सरकार को जूनियर डॉक्टरों की सभी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करना होगा. वहीं फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने भी जूनियर डॉक्टरों को समर्थन दिया है. एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राकेश बागड़ी ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान ने जिस तरह की निष्ठुरता दिखाई है वो दुखद है.

यहां बेहद कम है डॉक्टरों का स्टाइपंड

उन्होंने जूनियर डॉक्टरों को उनकी हड़ताल खत्म करने के लिए अलग अलग तरीकों से परेशान किया गया. यही नहीं जेडीए के अध्यक्ष और इस प्रदर्शन को लीड कर रहे डॉ. हरीश पाठक के परिवार को धमकाए जाने की घटना भी सामने आई है जो हैरान-परेशान करने वाली है. हर कर्मचारी के पास अपने कुछ स्वयं के अधिकार होते है. मगर ये अधिकार मध्यप्रदेश सरकार देना नहीं चाहती.

मरीज की जान से नहीं होने देंगे खिलवाड़, नर्सों ने आउटसोर्स के खिलाफ उठाई आवाज

बता दें कि बीते छह महीनों से डॉक्टर प्रशासन से बातचीत में जुटे है. मगर अबतक उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला है लिखित तौर पर कोई आदेश जारी नहीं हुआ है. लिखित आदेश की मांग करते हुए बीते 5 दिनों से डॉक्टर हड़ताल पर है. इसके बाद भी राज्य सरकार ने इस मामले पर कोई बात नहीं की. सरकार के व्यवहार से दुखी डॉक्टरों को सामूहिक इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया.

The Depth

TheDepth is India's own unbiased digital news website.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: